Published on January 1, 2022 12:50 pm by MaiBihar Media
कृषि विभाग ने किसानों को जैविक खेती के तौर तरीकों के बारे में बताया कि किसानों को हरी खाद के रूप में सनई, ढैचा या मूंग की खेती जरूर करनी चाहिये, एवं इसकी फली तोड़ कर दाल के रूप में प्रयोग कर ले बाकी पौधे को जोतकर मिट्टी में मिलते हुये एक बहुत ही अच्छी हरी खाद का काम करती है। किसानों को जैविक खेती के लिये बर्मी कंपोस्ट काफी फायदेमंद होगा। जानकारों ने बताया कि वर्मी कंपोस्ट बनाने के लिये अाइसिनिया फेटिडा नामक लाल केंचुआ का प्रयोग करना होता है। बर्मी कंपोस्ट बनाने के लिये कच्चा गोबर की जगह 20 ,25 दिन पुराना ठंडा गोबर का प्रयोग करते हैं एवं एक बर्मी कंपोस्ट जिसकी लंबाई 10 फिट चौड़ाई 3 फिट एवं गहराई 2.5 फिट में 1500 केंचुआ का प्रयोग करना उत्तम होता है। किसानों को आज के परिवेश में खाद्यान्न एवं साग सब्जी की कोई कमी नहीं है पर्याप्त उत्पादन हो रहा है। अब जरूरत है उनके गुणवत्ता एवं मिट्टी के स्वास्थ्य को बनाए रखने की, इसलिए अब हमें अपनी पुरानी पद्धति जैविक खेती की तरफ चलना पड़ेगा, और अपने खेत एवं उत्पाद के स्थिति में सुधार करना होगा, जिससे हम बहुत सारे रोग एवं व्याधि से बच सकें एवं अपना धनार्जन भी कर सकें। किसानों को जैविक खाद एवं कीटनाशक का प्रयोग करते हुये अपनी मिट्टी एवं अपने उत्पाद को विषैले केमिकल के प्रभाव से मुक्त करने की जरूरत है। पराली प्रबंधन के लिए पूसा डिकम्पोजर कैप्सूल का निशुल्क वितरण किया जा रहा है। जिससे किसानों को काफी फायदा मिलता है। वहीं खेतों में किसानों को पराली जलाने से मना किया जा रहा है ताकि खेतों की उर्वरा शक्ति कम नहीं हो।
