हिन्दू कैलेंडर के अनुसार, आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को हर वर्ष जीवित्पुत्रिका व्रत होता है। इसे कुछ स्थानों पर जितिया व्रत भी कहा जाता है। इस बार का जितिया व्रत महिलाओं के लिए कठिन होगा क्योंकि इसबार 36 घंटे तक बिना अन्न पानी का निर्जला रहते हुए व्रत करना होगा। मालूम हो कि इस व्रत को जिउतिया, जितिया, जीवित्पुत्रिका, जीमूतवाहन व्रत नाम से जाना जाता है। ये व्रत तीन दिन तक चलता है। जितिया पर्व महिलाओं का बेहद खास होता है। इस दिन वे संतान की लंबी उम्र की कामना से व्रत रखती हैं।

जानिए कब से शुरू हो रहा शुभ मुहूर्त

मिथिला मतानुसार आगामी 28 सितंबर की अहले सुबह 3:30 बजे ओठगन का समय निर्धारित है। फिर ओठगन करने के साथ ही व्रत का शुभारंभ हो जाएगा, जो 28 सितंबर की दिन व रात उपवास एवं प्रदोष समय जीमूतवाहन पूजन के बाद अगले दिन करीब 36 घंटे बाद 29 सितंबर की संध्या 05:21 बजे पारण का समय निर्धारित किया गया है। पारण किए बिना व्रत पूरा नहीं होता है और उसका संपूर्ण फल भी प्राप्त नहीं होता है।

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जीवित्पुत्रिका के पिछे क्या है मान्यता

ऐसी मान्यता है कि भविष्य पुराण के अनुसार प्रदोष काल में महिलाएं जीमूतवाहन का पूजन अपने घर में ही करें। तिथितत्त्व चिन्तामणि के अनुसार, यदि सूर्य का उदय सप्तमी में हुआ एवं उसके बाद अष्टमी हो तो उसी दिन व्रत उपवास करना चाहिए, दुसरे दिन नहीं।

जीवित्पुत्रिका व्रत का महत्व

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस व्रत को करने से संतान को दीर्घ आयु, आरोग्य और सुखी जीवन प्राप्त होता है। यह कठिन व्रतों में से एक है।इस व्रत में पानी और अन्न का त्याग किया जाता है, इसलिए यह निर्जला व्रत भी कहलाता है। महिलाओं के लिए यह व्रत काफी खास होता है।

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