सुहागिन महिलाओं का सबसे अधिक लोकप्रिय त्यौहार करवा चौथ आज पूरे देश में मनाया जा रहा है। स्त्रियों के सौभाग्य को बढ़ाने वाली कार्तिक कृष्ण चौथ व्रत को संकष्टी गणेश चौथ व्रत भी कहते है। इस व्रत के प्रधान देवता श्रीगणेश है। सुहाग की रक्षा, सुख व समृद्धि के लिए दिन भर महिलाएं आज निर्जला उपवास पर रहेंगी।

रात्रि में चरनी से चंद्रमा को देख पति के हाथों पानी पीकर अपना व्रत तोड़ेंगी। मान्यता है कि इस दिन सास अपनी सुहागिन बहू को वस्त्र श्रंगार के साथ पूजा से जुड़ी चीजें उपलब्ध कराती हैं। बता दें कि इस बार चंद्रोदय 07:52 बजे है। रात्रि 08:00 बजे चंद्रमा का अर्घ्य देना सर्वोत्तम है।

भूल कर भी न करें यह काम

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बारहो मास के चौथ व्रत में बारह गणपति के अलग-अलग नामों के पूजन का विधान है। उसी में से एक यह करवा चौथ भी है। इस दिन सुहागिन महिलाएं गणपति के पूजन में तुलसी न प्रयोग न करें। बप्पा के पूजन में दुर्वा और विल्वपत्र का प्रयोग विशेषकर करे। गणपति को उड़द और घी का होम करे, साथ ही मोदक प्रिय गजानन को मोदक अवश्य चढ़ाए। पूजा के बाद चंद्रमा को अर्घ्य अवश्य दें, फिर चरनी से चांद देख पति के हाथों या सामने जल पीने की परंपरा

ऐसी मान्यता है कि युद्धिष्ठिर ने भी विपत्ति प्राप्त होने पर भगवान श्रीकृष्ण की सलाह पर संकष्टी गणेश चौथ व्रत को किया था। सुहागिन महिलाएं पूजन में गणपति से अपने पति की दशों दिशाओं में रक्षा की कामना करनी चाहिए। है। इस दिन गणपति मंत्र का जाप श्रेयस्कर होगा। गणपति मंत्र के अलावे इस दिन गणपत्यर्थशीर्ष का पाठ भी करें, जो काफी लाभप्रद होगा।

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