Published on May 5, 2022 8:32 pm by MaiBihar Media
जहानाबाद जिले के हुलासगंज क्षेत्र के लक्ष्मी नारायण गोपुरम के मठाधीश रंग रामानुजाचार्य जी महाराज ने आज अंतिम सांसे ली। अपको बता दें कि महाराज ने जहानाबाद जिले के हुलासगंज ही नहीं बल्कि देश के कोने कोने में इनके श्रद्धालु है। महाराज ने हिंदू धर्म में आ रही विकृतियों को रोकने का कार्य किया। वहीं कई सामाजिक कुरीतियों को दूर करने का कार्य किया।
वैष्णव धर्म में आस्था रखने वालों के प्रति रखते थे अथाह प्रेम
महाराज ने अपने शिष्य परंपरा में सभी वर्गों के लोगों को शामिल करने का प्रयास किया चाहे कोई भी जाति का व्यक्ति हो अगर वैष्णव धर्म में आस्था रखता हो तो उन्होंने उसे अपने शिष्य के रूप में स्वीकार करने में कोई हिचकिचाहट नहीं दिखाई । यही कारण है की हुलासगंज स्थित लक्ष्मी नारायण मंदिर की ख्याति सुदूरवर्ती क्षेत्रों में निरंतर बढ़ती गई।
डीम्ड यूनिवर्सिटी के रूप में भी हुलासगंज की दिलाई पहचान
अपको बता दें कि महाराज ने हुलासगंज के लक्ष्मी नारायण मंदिर में संस्कृत विद्यालय संस्कृत महाविद्यालय एवं मानव संसाधन विकास से प्राप्त डीम्ड यूनिवर्सिटी के रूप में भी हुलासगंज के पहचान दिलाई। महाविद्यालय से निकलने वाले छात्र देश के कोने कोने में संस्कृत साहित्य एवं वैदिक परंपरा का परचम लहरा रहे हैं।
असहाय बच्चों की पठन-पाठन में करते थे मदद
महाराज रंगरामानुजाचार्य के द्वारा असहाय बच्चों के पठन-पाठन ही नहीं, भरण पोषण की समग्र व्यवस्था संस्थान के द्वारा निशुल्क की जाती थी। जिसका प्रत्यक्ष प्रमाण विद्यालय में शिक्षा अध्ययन करने वाले सैकड़ों छात्र हैं वह अपने पीछे एक गुरुकुल परंपरा के संपूर्ण आयाम को छोड़ गए हैं। साथ ही साथ हुलासगंज सरौती महेन्दिया एवं पुरी नियर स्थापित उनके मठ उनकी याद दिलाते रहेंगे ।
अंतिम दर्शन को लगी रही भीड़
लोगों तक जैसे ही परम पद प्राप्त करने की बात पहुंची लोग लक्ष्मी नारायण मंदिर के प्रांगण में इकट्ठा होने लगे । वहीं महाराज रंगरामानुजाचार्य जी महाराज के अंतिम दर्शन को लेकर लोगों की काफी भीड़ लगी रही।
