संतान की मंगल कामना के लिए हर साल आश्विन माह के पहला पख अष्टमी को जिउतिया व्रत रखा जाता है। इसे जीवित्पुत्रिका, जितिया, या जीमूत वाहन का व्रत कहते हैं। संतानों की मंगल कामना के लिए रखा जाने वाला जिउतिया व्रत आज नहाय खाय के साथ शुरू हो रहा है। विधि विधान के अनुसार नहाए खाए महिलाएं यह व्रत करेगी और बुधवार को संतान की लंबी आयु के लिए अखंड निर्जला उपवास रखेंगी। इसके साथ ही गुरुवार को पारण के साथ वाद का समापन होगा और इसी दौरान कई प्रकार के व्यंजन भी बनेंगे।

व्रत रखने की विधि
स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। भगवान जीमूतवाहन की पूजा करें। इसके लिए कुशा से बनी जीमूतवाहन की प्रतिमा को धूप-दीप, चावल, पुष्प आदि अर्पित करें। इस व्रत में मिट्टी और गाय के गोबर से चील व सियारिन की मूर्ति बनाई जाती है। इनके माथे पर लाल सिंदूर का टीका लगाया जाता है। पूजा समाप्त होने के बाद जीवित्पुत्रिका व्रत की कथा सुनी जाती है। पारण के बाद यथाशक्ति दान और दक्षिणा दें।

शुभ मुहूर्त में कब क्या करें

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नहाय-खाय – 28 सितंबर मंगलवार

सरगही ( ओठघन) रात 12 बजे से 3 बजे

अष्टमी तिथि प्रारंभ: 28 सितंबर को शाम 6 बजकर16 मिनट से

जीवित्पुत्रिका व्रत: 29 सितंबर बुधवार

अष्टमी तिथि की समाप्ति : 29 सितंबर की रात 8 बजकर 29 मिनट पर

पारण – 30 सितंबर प्रातः 6 बजे के बाद (गाय के कच्चे दूध से )

क्या होता है सरगही
28 सितंबर को नहाय खाय होगा। 28 सितंबर को ही शाम 6 बजकर 16 मिनट के बाद अष्टमी तिथि का प्रवेश होगा और बुधवार 29 सितंबर को सूर्यास्त के बाद तक चलेगा । अर्थात 28 सितंबर मंगलवार को शाम 6.16 के बाद अन्न ग्रहण तो वर्जित रहेगा लेकिन फल, दूध , रसगुल्ला आदि से सरगही ( ओठगन ) किया जा सकेगा। रात 12:00 बजे से सुबह 4:00 बजे तक सरगही किया जा सकता है। बुधवार 29 सितंबर को पूरा दिन एवं पूरी रात को व्रत रहेगा ।

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कच्चा दूध से पारण
बुधवार को दिन-रात उपवास के बाद गुरुवार की अहले सुबह स्नान ध्यान के बाद पारण होगा। गुरुवार 30 सितंबर को सूर्योदय साथ ही जितिया व्रत का पारण होगा। इसके लिए व्रती महिलाएं ब्रह्म मुहूर्त में 3:00 बजे जाग जाएंगी। स्नान – ध्यान के बाद 6:00 बजे भगवान की पूजा अर्चना कर सर्वप्रथम गाय का कच्चा दूध पीकर पारण करेंगी।

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