Published on August 24, 2021 4:12 pm by MaiBihar Media

11 जुलाई को विश्व जनसंख्या दिवस मनाया जाता है। इस दिन अमूमन लोग यह संकल्प लेते है कि जनसंख्या वृद्धि पर रोक लगाना है। वहीं, अब इस कड़ी में उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने अनियंत्रित जनसंख्या पर नियंत्रण हेतु कानून का ड्राफ्ट तैयार कर लिया है। अगर यह ड्राफ्ट कानून में तब्दील होता है तो 2 से ज्यादा बच्चे होंगे, उन्हें सरकारी नौकरी नहीं मिलेगी। इसके अलावे अन्य कई सुविधाओँ से भी वंचित रखेगी सरकार। मालूम हो कि इस ड्राफ्ट को तैयार करने वाले राज्य विधि आयोग के अध्यक्ष जस्टिस आदित्यनाथ मित्तल ने किया है। बता दें कि इससे पहले मित्तल ने लव जिहाद कानून का ड्राफ्ट भी तैयार कर चुके हैं।

बता दें कि राज्य विधि आयोग ने ड्राफ्ट को उत्तर प्रदेश जनसंख्या विधेयक-2021 नाम दिया है। आयोग ने ड्राफ्ट अपनी वेबसाइट पर भी शुक्रवार को अपलोड कर दिया। 19 जुलाई तक इस ड्राफ्ट के बारे में जनता से राय मांगी गई है।

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आइए जानते हैं, इस ड्राफ्ट की क्या प्रारुप है-

नहीं मानने वालों को होगा यह घाटा
खबर है कि इस ड्राफ्ट के अंतर्गत यह प्रावधान है कि दो से ज्यादा बच्चे वाले लोग स्थानिय व निकाय चुनाव नहीं लड़ पाएंगे। उन्हें सरकारी योजनाओँ का लाभ नहीं मिलेगा। साथ ही राशन कार्ड में भी चार से अधिक सदस्यों के नाम नहीं लिखे जाएंगे। 21 साल से अधिक उम्र के युवक और 18 साल से अधिक उम्र की युवतियों पर एक्ट लागू होगा। वहीं, ड्राफ्ट में यह भी है कि तीसरे बच्चे को गोद लेने पर रोक नहीं रहेगी। यदि किसी के 2 बच्चे नि:शक्त हैं तो उसे तीसरी संतान होने पर सुविधाओं से वंचित नहीं किया जाएगा।विधि आयोग ने इस बाबत बताया है कि अनियंत्रित जनसंख्या के कारण पूरी व्यवस्था प्रभावित हो रही है। आयोग ने ड्राफ्ट पर 19 जुलाई तक जनता से राम मांगी है।

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मानने वालों को होगा यह फायदा
जनसंख्या नियंत्रण को लेकर सरकार द्वारा उठाए गए कदमों से फायदे भी है, जो नागरिकों को मिलेंगे।

  • दो बच्चे की नीति अपनाने वाले अभिभावकों को कई तरह की सुविधाएं मिलेंगी
  • ऐसे अभिभावक जिनके दो बच्चे है और वे सरकारी नौकरी में है और अपनी इच्छा से नसबंदी कराते हैं तो उन्हें दो एक्स्ट्रा इंक्रीमेंट, प्रमोशन, सरकारी आवासीय योजनाओं में छूट, पीएफ में एंप्लायर कॉन्ट्रिब्यूशन जैसी सुविधाएं मिलेंगी।
  • पानी, बिजली, हाउस और टैक्स में भी छूट देगी सरकार
  • एक संतान पर स्वय नसबंदी कराने वाले अभिभावको की संतान को 20 साल तक मुफ्त इलाज, शिक्षा, बीमा शिक्षण संस्था व सरकारी नौकरियों में प्राथमिकता देने जैसे नियम बनाए गए हैँ।
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