Published on November 8, 2021 9:10 pm by MaiBihar Media

छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में रविवार देर रात केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के जवान ने एके-47 से अपने साथियों पर फायरिंग कर दी। घटना में 4 जवानों की मौत हो गई, जबकि 3 घायल हैं। वारदात मरईगुड़ा थाना क्षेत्र के लिंगनपल्ली में सीआरपीएफ की 217 बटालियन के कैंप की है। बता दें कि फायरिंग में मारे गए तीन जवान बिहार के रोहतास, कैमूर तथा भोजपुर के रहने वाले थे और एक पश्चिम बंगाल का निवासी था। खास बात यह है कि गोली चलाने वाला जवान भी बिहार का ही है।

घटना पर क्या बोले एसपी
एसपी सुनील शर्मा ने बताया, रितेश ने साथी जवानों के दुर्व्यवहार और छींटाकशी से परेशान होकर वारदात की बात कही है। एसपी ने कहा, साथी जवानों को हंसता देख रितेश को लगता था कि वे उसकी खिल्ली उड़ा रहे हैं। इसलिए उसने साथियों के प्रति घृणा पाल ली थी। एसपी ने कहा, शुरुआती जांच से पता चलता है कि आरोपी जवान सनकी स्वभाव का है।

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जहानाबाद का है जवान जिसने अपने ही साथियों को मार डाल
आपको बता दें कि छतीसगढ़ में सीआरपीएफ के अपने चार साथियों को अपने सर्विस राइफल से मौत की नींद सुलाने वाला रितेश रंजन जहानाबाद जिले के मोदनगंज प्रखंड के वैना गांव का निवासी है। ग्रामीण इस पूरे प्रकरण में उसकी मानसिक हालत को जिम्मेदार मान रहे हैं। गांव के लोगों के अनुसार उसकी मानसिक हालत ठीक नहीं थी। वह शुरू से ही थोड़ा सनक मिजाज किश्म का लड़का था। उसकी 2016 में रांची में साइकेट्रिक यानि मनोचिकित्सा कराई गई थी। गांव वालों की माने तो उसके मानसिक इलाज की जानकारी उसके विभागीय अधिकारियों को भी थी।

मानसिक हालत खराब के बाद हथियार ड्यूटी लगाने पर होगी जांच
ग्रामीणों के अनुसार सीआरपीएफ के द्वारा रायपुर में उसका इलाज भी कराया गया था। कुछ दिनो तक उसकी मानसिक हालत देखते हुए उसे हथियार ड्यूटी से मुक्त कर दिया गया था लेकिन किन परिस्थितियों में उसे फिर से हथियार की ड्यूटी दी गई, यह जांच का विषय है और गांव के लोगों ने बताया कि सीआरपीएफ से सूचना के अधिकार के तहत जानकारियां मांगी जाएगी कि आखिर यह जानते हुए कि उसकी मानसिक हालत ठीक नहीं है तो फिर किस परिस्थिति में उसे रायफल के साथ ड्यूटी लगाई गई।

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आखिर जवान ने अपने साथियों पर क्यों चलाई गोली
आज उसकी करतूत राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना है। लेकिन गांव के लोग घटना के लिए उसकी खराब मानसिक हालत को जिम्मेदार मान रहे हैं। गांव के कुछ दोस्तों से वह बात करता रहता था। ग्रामीणों के अनुसार गत 26 अक्टूबर को उसने शायद छुट्‌टी के लिए आवेदन दिया था लेकिन मंजूर नहीं हुआ था। ग्रामीण सूत्रों ने बताया कि उसे छ़ुट्‌टी नहीं मिलने को लेकर उसके कुछ दोस्तों ने उससे मजाक कर दिया, जिससे वह ज्यादा अवसाद व टेंशन में आ गया और फिर इस तरह की घटना को अंजाम दे डाला।

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